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Aaj ki baat! Kuchh Hamari Bhi Suno !

यह सवाल राजनीतिक दलों से बाद में किया जाये पहले मुसलमानों से किया जाये कि उन्होंने अपने हालात सुधारने के लिये क्या किया ? मुसलमान अगर गंदी बस्तियों में रहते हैं तो उन्हें साफ करने की जिम्मेदारी नगर निगम की ज्यादा है या फिर उन मुसलमानों की जो वहां से रोजाना नाक पर रुमाल रखकर गुजरते हैं ? मुसलमानों के बच्चे अगर स्कूल की बजाय ढ़ाबे पर चाय का गिलास पकड़ा रहे हैं तो क्या इसमें भी किसी नेता का दोष है ? मुसलमान, सिर्फ मुसमलान ही क्या इस देश की अवाम ही क्यों नहीं सोचती कि नेता कभी नहीं चाहते कि जनता के बच्चे भी पढ़ जायें, क्योंकि पढ़ गये तो सवाल करेंगे, वे सवाल एसे होंगे जिनका जवाब किसी नेता से नहीं दिया जायेगा। जिन मुसलमानों को औवेसी में जादुई छ़ड़ी, सालार ए कौम, रफीके मिल्लत नजर आ रहा है, वह औवेसी खुद लंदन से पढ़कर आया है। मगर सलीम लंगड़े, पप्पू चाय वाले, सुलेमान दर्जी, कल्लन धोबी, वे कल भी अपना पेशावर काम कर रहे थे और उनके बच्चे भी उसी काम में लग गये हैं। मुझे लगता है कि मुसलमानों को मौजूदा वक्त की सियासत से किनारा कर लेना चाहिये और खुद को शिक्षा की तरफ मुतव्वजो करना चाहिये। मुसमलानों को आध...

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सूचना का अधिकार अधिनियम   कानून सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) भारत के संसद द्वारा पारित एक कानून है जो 12 अक्तूबर, 2005 को लागू हुआ (15 जून, 2005 को इसके कानून बनने के 120 वें दिन)। भारत में भ्रटाचार को रोकने और समाप्त करने के लिये इसे बहुत ही प्रभावी कदम बताया जाता है। इस नियम के द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सरकारी रेकार्डों और प्रपत्रों में दर्ज सूचना को देखने और उसे प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है। जम्मू एवं काश्मीर मे यह जम्मू एवं काश्मीर सूचना का अधिकार अधिनियम २०१२ के अन्तर्गत लागू है। भारत सरकार ने सदैव अपने नागरिको के जीवन को सहज, सुचारु बनाने पर बल दिया है और इस प्रकार इसे ध्यान में रखते हुए भारत को पूरी तरह लोक तांत्रिक बनाने के लिए आरटीआई अधिनियम स्थापित किया गया है। आरटीआई का अर्थ है सूचना का अधिकार और इसे संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। धारा 19 (1), जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है और उसे यह जानने का अधिकार है कि सरकार कैसे कार्य करती है, इसकी क्या भूमिका है, इस...

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राजस्थान कैडर के अधिकारी पंकज चौधरी  ने एक बार फिर ‘खाकी’ पर राजनेताओं के दबाव का भांडा फोड़ दिया है। पंकज चौधरी का कहना कि दंगे होते नहीं हैं कराये जाते हैं पूरी तरह दुरुस्त है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि खाकी पूरी तरह से निष्पक्ष और दंगाई नहीं है। हां इतना जरूर है कि खाकी के रखवालों को निष्पक्षता से ड्यूटी करने की कीमत समय – समय पर चुकानी पड़ती रही है। वीएन राय से लेकर संजीव भट्ट, हेमंत करकरे से लेकर आज के पंकज चौधरी तक ये वे नाम हैं जो सच्चाई से ड्यूटी करने का खामियाजा चुकाते आये हैं। दंगा इस मुल्क की एसी बीमारी, और राजनीतिक दलों के लिये एसा वरदान है जिसे जब चाहे इस्तेमाल किया जा सकता है। जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिये मंदिर मस्जिद को ‘विकास’ की राह में लाकर बैठा दिया जाता है। कुछ मरते हैं, कुछ घायल होते हैं, कुछ बर्बाद होते हैं, नतीजे में नफरतों की एसी फसल तैयार हो जाती है जिसके मन मस्तिष्क पर नफरत छा जाती है। अव्वल तो पंकज चौधरी जैसे अधिकारी बहुत कम हैं और जो हैं भी वे सियासत की भेंट चढ़े बैठे हैं, गुजरात के आईपीएस संजीव भट्ट से लेकर राजस्थान के पंकज चौधरी तक का जब त...

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मुस्लिम हुकुमत जिन्दाबाद। शेयर जरूर करें ताके दुनिया को पता चले सच का। सऊदी के किंग का एक ओर ऐलान, जिन जिन की भी मक्का हादसे में मोत हुई हे।उनको 1 करोड़ 75 लाख रूपये मिलेंगे।और परीवार के दो लोगों को हज फ्री में। मामूली रुप से घायल लोगो को5 लाख रियाल यानि के 88 लाख रुपए देने का ऐलान किया है.। बिन लादेन कंपनी भी हमेसा के बेन कर दी गई हे। मक्का. सऊदी अरब के शहर मक्का की अल हरम मस्जिद में क्रेन गिरने से हुए हादसे में हताहत लोगों के लिए किंग सलमान ने अपना खजाना खोल दिया है. सऊदी के किंग सलमान ने हादसे में मरने वालों को एक मिलियन रियाल यानि के 1 करोड़ 75 लाख रुपए, गंभीर रुप से घायलों को भी 1 करोड़ 75 लाख और मामूली रुप से घायलों के लिए 5 लाख रियाल यानि के 88 लाख रुपए देने का ऐलान किया है.   इसी के साथ किंग ने कहा है कि सऊदी सरकार क्रेन हादसे में मरने वाले लोगों के दो फैमिली मेंबर को अगले साल मेहमान का दर्जा देकर उनके हज का सारा खर्चा खुद वहन करेगी. हादसे में मरने वाले 111 लोगों में 11 भारतीय भी शामिल हैं.   सऊदी की मुख्य निर्माण कंपनी बिन लादेन समूह निलंबित-   शाही अदालत ने अपने...

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हिन्दू भाइयों को इतिहास में केवल मुसलमानों की बुराई बतलाई जाती है और हिन्दुओं की बुराई छुपा ली जाती है, "Know the Truth" शूद्र महर्षि शम्बूक की ह्त्या किसने की थी?  एकलव्य का अंगूठा किसने काटा? विधटन कारी चार वर्ण किसने बनाये? मगध राज्य पर हमला के लिए सिकन्दर को किसने बुलाया था? भारतिय इतिहास का स्वर्णिमप्रुष्ठ लिखने वाले ब्रहद्रथ मौर्य की हत्या,बौध्धो का नरसंहार व विश्व विध्यालयो पुस्तकालयो को किसने ध्वस्त किया? हिटलर को भी बौना व फ़ीका बनाने वाली काले कानूनो की किताब मनुस्मुति का लेखक कौन था? ब्रह्मा सत्या जगत मिथ्या के मिथ्यावाद की आड में गुप्तकाल के स्वर्ण युग की विनाश लीला किसने की? प्रुथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय विहीन किसने किया? सोमनाथ के मंदिर का झण्डा झुकाकर मोहम्मद बिनकासिम की विजय किसने सुनिश्चित की?  सोमनाथ के मंदिर का जो फ़ाटक हाथियो से भी नही टूट्ता उसे मोहम्मद गजनी के लिए किस गद्दार व लालची ने खोला? मोहम्मद गोरी को जयचन्द की चिठ्ठी ले जाने वाला कौन था? बंगाल का वह गद्दार राजा कौन था जो मोहम्मद बख्तियार के डर से महल के पीछे के दरवाजे भाग गया था?  अकबर की भं...

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पाकिस्तान हमारा भाई है :- इन घृणित संघियों पर जितना लिखना ना चाहो यह उतना ही अवसर देते हैं कि मैं इनपर लिखूँ ।सदैव की तरह आदतन संघ ने कल एक और पलटी मारी और बयान दिया कि "पाकिस्तान और बांग्लादेश हमारे भाई हैं" सुन कर सब स्तब्ध हो गये होंगे पर भक्तों को कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि वह इसके अभ्यस्त हैं उन्होने तुरंत वही लाईन पकड़ी और पाकिस्तान को अपना भाई बताने लगे जिसे कल तक पानी पीपी कर गालियाँ देते थे । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म जिन मुद्दों पर हुआ था उसमें बचा यह आखरी मुद्दा था जिसकी कल तिलांजलि दे दी गई , धारा 370 , उसकी तिलांजलि जम्मू कश्मीर में सरकार बनाकर दी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को जम्मू कश्मीर के संविधान की शपथ लेकर लात मार दी। कामन सिविल कोड दफन हो गया और उसकी चर्चा समाप्त, बाद में जुड़ा श्रीराम मंदिर जो वह बोल चुके हैं कि दो तिहाई बहुमत और राज्यसभा में बहुमत मिलने पर ही होगा जो लगभग असंभव है , और सबसे महत्वपूर्ण था पाकिस्तान से विरोध , पाकिस्तान का नाम लेकर भारत के मुसलमानों को प्रताड़ित और अपमानित करता रहा है पर संभवतः अब नहीं करेगा क्योंकि पाकिस्ता...

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है क्या इसको जानिए। RSS - अंग्रेज़ो की स्थापित की गयी एक संस्था थी जिसका काम था धर्म जाति के आधार पर देश में फूट डाले रखना ताकि अंग्रेज़ो का शासन चलता रहे इसका अंग्रेजी नाम था रॉयल सीक्रेट सर्विस जो अंग्रेज़ो के लिए काम करती थी इसीलिए आरएसएस का आज़ादी के आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है। जब 15 अगस्त को देश आज़ाद हुआ तब आरएसएस ने स्वाधीनता दिवस मनाने से इंकार किया था और 1947 से लेकर 2002 तक नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा कभी नहीं फहराया। और वर्ष 2002 के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिरंगा फहराया गया। सरदार पटेल जी ने आरएसएस पर प्रतिबन्ध (बैन) इसीलिए लगाया था क्योंकि उसने(आरएसएस ने)14 अगस्त को स्वाधीनता दिवस मनाया था जोकि पाकिस्तान का दिवस है और साथ ही महात्मा गांधी की हत्या में भी लिप्त पाये गए थे। आरएसएस ने बैन हटाने के लिए जो हलफनामा दिया था उसमे निम्नलिखित मुख्य बातें थी। 1).कि वो भारत के संविधान को मानेगा.., जिसको वो नहीं मानता था और आज भी नहीं मानता है इसीलिए स्वयं सेवक गैर संवैधानिक बयान देते है। 2).आरएसएस संविधान में निहित राष्ट्रीय प्रतीकों का विरोध नहीं क...