आज की बात हमारे साथ

सुनो रे याकूब मैमन शहीद नहीं है उसे शहीद मत कहो। हां उसकी संलिप्तता से इंकार नहीं, हां उसे फांसी दे दी गई और प्रधानमंत्री के कातिलों की फांसी माफ कर दी गई इस बात से भी इंकार नहीं। मगर मुझे याकूब को शहीद कहने से जरूर आपत्ती है। वह गुनाहगार जरूर था, मगर शिकायत इतनी भर है कि उसी गुनाह के दूसरे अपराधी सत्ता के गलियारों में हैं और उसे फांसी दे दी। याकूब को शहीद कहना बंद करो विरोध सिर्फ फांसी का है न कि याकूब के अपराध को सही ठहराना है।

गांधी के कातिल मुझे वतन परस्ती न सिखायें और याकूब मैमन को शहीद कहने वाले मुझे इस्लाम न सिखायें। याकूब के परिवार के साथ मेरी हमदर्दी जरूर है लेकिन वह शहीद नहीं है।


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