Aaj Ki Bat !

जब से मैंने कोबरापोस्ट का स्टिंग "आपरेशन जन्मभूमि" देखा है, तब से ज़हन मे बार बार एक ही वाक्य गूंज रहा है ......"कुछ लोग जब तक नहीं मरेंगे तब तक ये आंदोलन आगे नहीं बढ़ सकेगा ....."

यदि इनकी यही कार्यशैली है तो फिर इस आशंका को बल मिलता है कि इसी प्रकार की साजिश का शिकार साबरमती एक्सप्रेस मे अयोध्या से कारसेवा कर के लौट रहे कारसेवक भी बने, और देश को दंगों की आग मे झोंकने के लिए अपने ही लोगों द्वारा मार डाले गए

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार :
गोधरा मे हुए ट्रेन अग्निकांड से पहले बोगी-6 मे सवार कार सेवक जगह जगह मार पीट और तोड़ फोड़ करते हुए आए थे (गोधरा से पहले दाहोद स्टेशन पर एक स्टाल वाले की दुकान मे इन कार सेवकों ने तोड़ फोड़ की थी जिसकी NCR वहाँ थाने मे दर्ज की गई थी)
गोधरा स्टेशन पर इन कार सेवकों ने एक मुस्लिम लड़की को गलत इरादे से खींच कर ट्रेन मे बंधक बना लिया था और बोगी के सारे खिड़की दरवाजे बंद कर लिए थे
लड़की को छुड़ाने के लिए लोगों ने बाहर से बोगी पर पत्थर भी मारे ...... लेकिन ट्रेन मे बाहर से आग लगाई गई सबूत इस बात के विरुद्ध हैं ..... सबूत बताते हैं कि आग लगाने की तैयारी बोगी मे पहले से कर के रखी गई थी 

सितंबर, 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज यूसी बनर्जी की अध्यक्षता में गोधरा कांड की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया ।
समिति ने माना कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 बोगी में आग अंदर से लगी थी। आयोग ने कहा कि आगजनी के वक्त ट्रेन जहां खड़ी थी, वहां से इसकी बोगियों में बाहर से आग लगा पाना संभव नहीं था ।

उस समय इण्डिया टाइम्स मे छपी रिपोर्ट बताती है कि जिस जगह ट्रेन उस वक्त खड़ी थी, वहां ट्रेन की खिड़कियां जमीन से 7 फुट ऊपर थीं और जैसा दावा किया गया है कि ट्रेन पर केन और बाल्टियों को भर भर कर पेट्रोल फेंका गया, तो इस तरह तो ट्रेन के अन्दर से ज्यादा पेट्रोल ट्रेन की बाहरी दीवारों और ट्रैक पर गिरता और आग रेलवे ट्रैक पर भी लग जाती ....... लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ

आप जली हुई ट्रेन की कोई भी फोटो देख लीजिए ट्रेन की खिड़कियों से आग बाहर आती दिखाई देगी , जिससे ही स्पष्ट हो जाता है कि बोगी मे आग अन्दर से लगी थी

खिड़कियों से नीचे का थोड़ा सा ही हिस्सा आग से प्रभावित हुआ है ट्रेन के बाहरी भाग के निचले हिस्से मे बिल्कुल आग नहीं लगी थी .... जबकि अगर बाहर से पेट्रोल फेंका गया होता तो वो बहकर नीचे आया होता और ट्रेन के निचले बाहरी हिस्से मे भी आग लगी होती

जबकि आग लगने के साथ ही बोगी अन्दर से पूरी तरह जल गई थी ये तभी सम्भव था जबकि पेट्रोल या कोई भी ज्वलनशील पदार्थ अन्दर से डाला गया हो , 
बोगी के अन्दर उस समय बाहर से पेट्रोल भी नहीं डाला जा सकता था क्योंकि बोगी के सारे दरवाजे खिड़कियां अन्दर से बंद कर ली गई थीं
इन सब बातों का सीधा सा अर्थ निकलता है कि बोगी मे सवार कार सेवकों को पहले से उकसाया गया था कि गोधरा स्टेशन पर एक मुस्लिम व्यक्ति की चाय की दुकान है उसकी लड़की को उठा लिया जाए । जबकि उसके बाद की योजना के बारे मे बोगी मे सवार कारसेवको को भी नहीं पता था कि उनको जला कर मार डालने की साजिश की गई थी
बोगी मे मौका देखकर सम्भवत: रिमोट से आग लगा दी गई और पहले से तय योजना के तहत बोगी मे आग लगते ही पूरे गुजरात मे विहिप और RSS के नेताओं ने हिन्दुओं को मुसलमानों के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया जगह जगह मुसलमानों की हत्याएं करने लगे

जबकि अचानक इस तरह की खबरें मिलने पर वस्तुस्थति समझने मे ही काफी वक्त लग जाता है, मौके पर क्या हुआ क्या नहीं ये ही पता नही लग पाता और इन्सान क्या करे वो अचानक समझ नहीं पाता लेकिन पूरे गुजरात मे जिस तरह विहिप आदि तत्काल हरकत मे आए उससे स्पष्ट है कि ये अग्निकांड विहिप द्वारा ही करवाया गया था ।

और ऐसे दस्तावेज भी मौजूद हैं जिनसे प्रमाणित होता है कि केवल विहिप, RSS ही नही बल्कि इस साजिश मे गुजरात प्रशासन भी शामिल था, क्योंकि ट्रेन जलने के फौरन बाद विहिप RSS द्वारा लोगों को भड़काने की सारी हरकतों की सूचनाएं पूरे गुजरात की पुलिस द्वारा प्रशासन को भेजी गईं लेकिन प्रशासन ने इन पर काबू पाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, रोकने के प्रयास तो दूर, उल्टे VHP और Rss के भड़काऊ कार्यक्रमों को ही प्रशासन ने पूरा समर्थन दिया जिससे पूरे गुजरात मे दंगे भड़के ।

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